भाविश कुमार की बायोग्राफी Founder of OLA ( Biography ) 2020

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भाविश कुमार की बायोग्राफी Founder of OLA ( Biography ) 2020
भाविश कुमार की बायोग्राफी Founder of OLA ( Biography ) 2020

भाविश कुमार की कहानी|

भाविश अग्रवाल ने अपने पापा से पहली बार जब अपने बिजनेस प्लान को डिस्कस किया था तो उनके पापा ने ताना मारते हुए कहा – तू ट्रेवल एजेंट बनना चाहता है ? ओला कैब के बारे में पूरी दुनिया जानती है लेकिन ola कैब के फाउंडर के बारे में बहुत कम लोग जानते है| ola के CEO और फाउंडर भाविश अग्रवाल भारत के सबसे कम उम्र के सबसे धनी उद्योगपतियों में से एक है. माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनी की नौकरी छोडकर अपने दम पर कुछ कर दिखाने का जज्बा भाविश अग्रवाल को आम लोगो से ख़ास बनाता है|

जन्म और परिवार 

OLA FOUNDER भाविश अग्रवाल का जन्म 28 अगस्त 1985 को पंजाब ( लुधियाना ) में हुआ था. भाविश के पिता का नाम नरेश कुमार है और माता का नाम उषा है| भाविश एक मध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखते थे|

शिक्षा दीक्षा 

भाविश अग्रवाल बचपन से ही एक इंटेलिजेंस बच्चे थे| स्कुल में भी वे अपनी पढाई पर बहुत ज्यादा ध्यान देते थे उनका अधिकतर समय दुसरे बच्चो के साथ खेलने कूदने की बजाय स्कूल लाइब्रेरी में बीतता था| बचपन से ही भाविश का सेन्सर्स ह्यूमर काफी अच्छा था. वे समस्याओं को अच्छे से समझ जाते थे और उन्हें सरल तरीके से हल करने की कोशिश करते थे|जब वे नौवी क्लास में थे तो उनके स्कूल में एक साइंस एग्रीवेशन हुआ जिसमे भाविश ने भी भाग लिया| दुसरे बच्चो से अलग भाविश ने अपने स्कूल की कुछ समस्याओं पर मॉडल बनाया. उनके मॉडल में स्कूल को और भी बेहतरीन तरीके से मॉडल किया जा सकता था| समय का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग कैसे किया जा सकता है| इस विषय का भी काफी ध्यान रखा गया था| बाहर से आये टीचर्स ने जब उनका ये मॉडल देखा तो वे भी भाविश की अलग सोच से काफी प्रभावित हुए|

भाविश अपनी पढाई के अलावा लाइब्रेरी में साइंस और टेक्नोलॉजी की किताबो को काफी गहराई से पढ़ते थे|और साथ ही क्लास में अपने टीचर्स से भी उन विषय पर चर्चा करते थे. 12वी की परीक्षा उन्होंने एवरेज परसेंट से पास की| इसके साथ ही उन्होंने IIT की परीक्षा भी निकाली| भाविश को IIT मुंबई में एडमिशन मिला| जहाँ से उन्होंने कम्प्यूटर साइंस में बीटेक इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की| उनके कॉलेज में जब नौकरियों के लिए कैंपस आये तो उनकी समस्याओं के प्रति समझ और सरल तरीके से उनका समाधान करने की क्षमता ने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में नौकरी दिलाई|

माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हुए भी वे दुनियाभर में इंटरनेट के बढिया उपयोग और इसकी नई संभावनाओं के सम्बन्ध में कई सारे आर्टिकल लिखते थे. इनमे से कुछ आर्टिकल तो बड़े बड़े इंटरनेशनल जनर्ल्स में भी छपते थे| इसी वजह से वे काफी ज्यादा पॉपुलर हो गये थे. भाविश अपनी जॉब से खुश तो थे लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने की इच्छा थी| भाविश चाहते थे कि वे अपने दम पर कुछ बड़ा करे| इसी सोच को आगे बढाते हुए उन्होंने साल 2010 में माईक्रोसॉफ्ट की जॉब छोड़ दी| अब वे कुछ ऐसा काम करना चाहते थे जो आम जनता के काम आये. उनका ध्यान भारत की पब्लिक ट्रांसपोर्ट समस्या पर गया| वे अक्सर देखते कॉलेज और नौकरी के लिए आने जाने में लोगो को परेशानियों का सामना करना पड़ता था| उनके दिमाग में आया अगर इस समस्या का हल किया जाए तो ये एक बड़ा बिजनेस बन सकता है|

दोस्त के साथ की ola कैब की स्थापना 

भाविश ने अपने एक दोस्त अंकित भाटी के साथ मिलकर ओला कैब की स्थापना की| जिसके लिए उन्होंने एक स्मार्टफोन एप्लीकेशन बनाया. भाविश ने इस एप्लीकेशन को इतना आसान बनाया कि कम पढ़े लिखे लोग भी इसका इस्तेमाल आसानी से कर सके| इसका फायदा ये हुआ कि बहुत कम समय में छात्र कॉलेज और नौकरी करने वाले लोग कम पैसो में और समय पर अपने ऑफिस पहुँचने लगे| कॉलेज छात्रों के लिए ये एक सुरक्षित यात्रा का साधन बन गया| शहर में लोगो को कहीं भी जाना हो Ola Cab 5 से 10 मिनट में उनके पास पहुँच जाती थी| ola ने भारत के ज्यादातर शहरों में अपना व्यापार शुरू किया और ये भारत के सबसे सफल स्टार्टप में से एक बन गया| 2017 में ola का व्यापार 2 हजार करोड़ से भी ज्यादा हो चूका था| ओला अपनी नई नई सुविधाओ से दिन-रात तरक्की कर रहा है|

पिता ने ओला बिजनेस करने से किया था इनकार 

भाविश के पिता को उसके बिजनेस करने से कोई दिक्कत नही थी बस उन्हें ये सब चिंता सताई जा रही थी कि इन सब चक्करों में कहीं उनका बेटा ट्रेवल एजेंट बनकर न रह जाए| इसलिए उन्होंने भाविश को सजेस्ट किया बेटा तुम्हारा जॉब एक्सपीरियंस अच्छा है| अगर तुम किसी ढंग की जगह से अपना MBA करके एक सोलेड ट्रैक रिकॉर्ड बना लेते हो तो बाद में तुम अपना खुद का बिजनेस कर सकते हो. भाविश के पिता उस समय कहीं न कहीं सही भी थे कि आखिर भाविश को इस इंडस्ट्री का आईडिया ही कितना है| भाविश को OLA ट्रिप वेबसाइट पर जब कोई रिस्पोंस नही मिला तो वे 2010 में हो रहे कॉमन विल्थ गेम के स्टेडियम के बाहर जाकर लोगो के बीच पेम्पलेट बांटने लगे| भाविश को लगा शायद यहाँ से उन्हें कुछ क्लाइंट्स मिल जाए| सुबह से शाम हो गयी लेकिन एक क्लाइंट को भी वे अपना पैकेज सेल नही कर पाए| इसके बाद वे मुंबई लौट आये|

मुंबई आकर भाविश ने अपने दोस्त के साथ एक नई वेबसाइट लॉन्च की OlaCabs.com 2010 में अपनी वेबसाइट के जरिये अपनी कार रेंट पर देने में कामयाब हुए| ऑनओला के शुरूआती दिनों में भाविश को सही तरह के ड्राइवर और कार ढूंढने के लिए भटकना पड़ा. लाइन कैब प्रोवाइड करने के 7 से 8 महीने में मार्किट में ये खबर फ़ैल गयी कि ओला कैब करके एक नया स्टार्टप आया है जो लोगो की रियल लाइफ प्रॉब्लम सॉल्व करने में लगा हुआ है| 2012 ओला कैब ने अपना मोबाईल एप लॉन्च किया तो लोगो के बीच ये एप काफी ज्यादा फेमस होने लगी और इन्वेस्टर को इसमें एक बहुत बड़ी ओपर्चुनेटिंग दिखाई देने लगी. SNEPDEAL के फाउंडर कुनाल बहल को ओला के एंजल इन्वेस्टमेंट बने|इसके बाद Shadi.com के फाउंडर अमित मितल ने भी इसमें इन्वेस्टमेंट की| 2012 के आखिर तक ओला के इन्वेस्टमेंट को फंडिंग मिलनी शुरू हो गयी| 

शुरू शुरू में जब कोई ड्राइवर नही मिल पाता था तो वे किसी की कार लेकर खुद लोगो को पिक करने पहुँच जाते थे|

दिन में 3 से 4 बार बुक करते है ओला भाविश ?

भाविश ने आज के समय में इतना सक्सेसफूल होने के बावजूद खुद के लिए कोई पर्सनल कार तक नही रखी हुई है. वे रोजाना दिन में एक कस्टमर की तरह 3 से 4 बार ओला कैब बुक करते है. ऐसा करके वे अपनी राइड का फीडबैंक आगे फोरवर्ड कर देते है

ओला कैब सर्विस शुरू होने से आम जनता को क्या फायदा हुआ ?

  • आज भी भारत में हर कोई आसानी से कार नही खरीद सकता है और जो खरीद भी रहे है उनके लिए पार्किंग और फ्यूल प्राइज जैसी चीजे एक डेली स्ट्रगल बन चुकी है. ऐसे में ओला कैब की एंट्री लोगो की हर समस्या का समाधान बनकर सामने आई है.
  • रोजाना नौकरी करने वाले लोगो को अब बस ऑटो का इंतज़ार नही करना पड़ता है. 5 से 10 मिनट के अंदर ओला कैब लोगो के घर के सामने आ जाती है.
  • बारिश हो या धूप लोगो को घर से बाहर जाने की जरूरत नही होती है वे सेफ्टी के साथ एक जगह से दूसरी जगह ओला कैब के माध्यम से पहुँच जाते है

निष्कर्ष –

भाविश अग्रवाल उन लोगो के लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत है जो सपने तो देखते है लेकिन उन्हें पूरा करने से डरते है. भाविश अग्रवाल एक आम नौकरी पेशा इंसान से भारत के सबसे यंग उद्योगपति बने. बचपन में ही उनके मन में ये इच्छा थी कि वे कुछ ऐसा बड़ा करे जो सबसे अलग हो. भाविश अग्रवाल की बायोग्राफी आज के युवा वर्ग के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है. भाविश के पिता ने तक कभी नही सोचा था उनका बेटा इतना आगे जा सकता है. वे हमेशा उन्हें पढाई पूरी करने के लिए कहते थे. लेकिन भाविश ने अपनी मेहनत और सोच से लोगो की सबसे बड़ी परेशानी को दूर किया है

भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी को कब कैब सर्विस का आईडिया आया और इस सर्विस का नाम ओला क्यों दिया ?

भाविश ने बैंगलोर से बांदीपुर जाने के लिए कार रेंट की तो कार वाले ने आधे रास्ते में कार रोक दी और उनसे पैसो का रिनेगोशिएष्ण करने लगा. भाविश ने उसे पैसे एक्सक्ट्रा देने से मना किया तो वो उन्हें बीच रास्ते में उतारकर चला गया. पुरे दिन भाविश यही सोचते रहे भारत में बिना जान पहचान के किसी को भी एक डिसेंट कैब सर्विस मिलना कितना मुश्किल काम है. कुछ दिन बाद वे एक हॉलीवुड क्लाइंट को पैकेज बेचने में लगे थे उस क्लाइंट ने भाविश से कहा नैनीताल जाना है कार दिला दो. ये बात सुनकर भाविश को समझ आया कि लोगो को कहीं भी आने जाने के लिए उसके ओला ट्रिप की जरूरत नही है बल्कि एक गाडी की जरूरत है. इस घटना के बाद भाविश मुम्बई आ गये. यहाँ आकर भाविश ने अपने दोस्त अंकित भाटी से लोगो के आने जाने की परेशानी पर डिसकस किया और दोनों ने मिलकर ओला कैब की स्थापना की|

ओला में ड्राईवर की जॉब करने या फिर खुद की गाडी को ओला में लगाने के लिए आपको क्या करना होगा ? 

  • ओला भारत की सबसे बड़ी कैब कम्पनियों में से एक है| ओला में ज्वाइन होने के लिए सबसे पहले आपको एक कार की जरूरत है| 
  • कार 5 साल से ज्यादा पुरानी नही होनी चाहिए|
  • कार में AC होना चाहिए| 
  • इसके बाद आपको कॉमर्शियल ड्राईविंग लाइसेंस की जरूरत होती है और साथ ही आपको नेशनल या तो स्टेट लेवल की परमिट की जरूरत पड़ेगी. इससे आपकी गाडी की नंबर प्लेट येलो कलर की हो जाएगी| 
  • गाडी के इंश्योरेंस पेपर,RC बुक और टेक्स रिसिप्ट और इसके बाद बैंक डिपोजिट के लिए कान्सेल्ड चेक की जरूरत पड़ेगी. साथ ही एड्रेस प्रूफ की जरूरत पड़ेगी|
  • कैब को यदि ड्राइवर चला रहा है तो उसका ऐड्रेस प्रूफ या तो आप खुद चला रहे हो तो आपका प्रूफ लगेगा|
  • आपके पास अगर उपर बताई गयी सभी चीजे रेडी है तो आप 7 दिन के अंदर ओला को ज्वाइन कर सकते है|

ओला में ज्वाइन होने के बाद आप कितना कमा सकते है ?

ओला और उबर दोनों का एक पेयआउट प्लान बना हुआ है| दोनों का फोर्मेट सेम है| अगर आप 5 ट्रिप पूरा करते है तो आपको 2000 रूपये मिलेंगे| इसी तरह अगर आप 7 ट्रिप पूरा करते है तो 2700 रूपये आपको मिलेंगे| 10 ट्रिप खत्म करने पर 4000 और 14 ट्रिप पर 6000 मिलेंगे. इस पेयआउट में ओला की टेक्स और आपकी कमाई दोनों इंकल्युड है| ओला टेक्स में ओला की फीस, साथ ही 25% उनका मुनाफा भी आ गया| गाडी का खर्चा मेंटेनेंस, पेट्रोल / डीजल का खर्चा, ड्राईवर की सैलरी ये सब मालिक के उपर है| 

यदि आप एक दिन में 10 ट्रिप खत्म करते है तो आपको महीने के 1,20,000. इसमें से ओला टेक्स 25% निकालकर 90,000 आपके पास बचता है|

ओला कैसे बुक किया जाता है ?

ओला कैब को शुरू हुए काफी समय हो चूका है लेकिन आज भी ऐसे काफी लोगो है जिनको ओला कैब बुक करना नही आता है. आप एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए आप आसानी से ओला कैब बुक कर सकते है| आइये जानते है कैसे करे ओला कैब बुक …

  • सबसे पहले फोन के प्ले स्टोर से ओला कैब एप्लीकेशन डाउनलोड कर लें. इसके बाद इसे ओपन करना है|
  • एप्लीकेशन खुलते ही आपको अपना फोन नंबर डाल देना है जिसपर एक OTP आता है. आपके पास एक OTP आएगा जिसे ये एप अपने आप उठा लेता है| 
  • अपना पूरा नाम भरे या फिर अपना मेल id भी डाल सकते है| 
  • रजीस्टर पर क्लिक करते ही आपके पास congratulation का msg आ जायेगा|
  • continue पर क्लिक कर दें, क्लिक करते ही आपकी करेंट लोकेशन को डिडेक्ट कर लेगा| 
  • आपके फोन स्क्रीन पर कैब बुक करने के कई ऑप्शन आयेंगे| आप माइक्रो बुक कर सकते है, मिनी या फिर प्राइम बुक कर सकते है. सभी गाडियों का प्राइज अलग अलग होता है|